brahmi ke fayde ब्राह्मी के फायदे, प्रकार और उपयोग विधि

ब्राह्मी के फायदे, प्रकार और उपयोग विधि

आयुर्वेद में विभिन्न प्रकार की जड़ी बूटियां मिलती है जो काफी सारी बिमारियों का इलाज करने में सक्षम होती है। ऐसी ही एक जड़ी बूटी है ब्राह्मी और आज मेरे घरेलु नुस्खे के इस लेख में हम ब्राम्ही के फायदे और उपयोग विधि ( brahmi ke fayde ) के बारे में विस्तार से जानेंगे। 

ब्राह्मी क्या है ? ( brahmi kya hai )

ब्राह्मी एक ऐसा पौधा है जिसका पत्ता, तना, बीज, जड़, फल और फूल सभी चीज़ों का औषद्यीय प्रयोग होता है। मुख्य रूप से इसका प्रयोग स्मरण शक्ति बढ़ने में किया जाता है। हलाकि इसका इस्तेमाल बुखार, पीलिया, मिर्गी, खांसी, बाल झड़ना इत्यादि कई सारी बिमारियों में भी किया जाता है।

ब्राह्मी की पहचान ( identification of brahmi or Waterhyssop )

brahmi ke fayde ब्राह्मी के फायदे, प्रकार और उपयोग विधि

असली ब्राह्मी की पहचान आप इन आधारों पर कर सकते हैं। ब्राम्ही के तने पत्तियां मुलायम और गूदे दार होते हैं।  सफ़ेद फूलों वाला ये पौधा नम और तराई वाले स्थानों में पाया जाता है। नाम व दलदलीय स्थान पर होने के कारण और स्वाद में कड़वी होने के कारन इसे जल नीम भी कहा जाता है। ब्राम्ही के पौधे की लम्बाई करीब 10-30 cm तक होती है। 

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ब्राह्मी को अन्य भाषा में क्या कहते हैं ? ( brahmi synonyms )

S. No.भाषा ब्राह्मी के अन्य भाषाओं में नाम
1अंग्रेज़ीBacopa (बैकोपा)
2संस्कृतकपोतवङ्का, सोमवल्ली, सरस्वती, ब्राह्मी, ऐद्री
3हिन्दीब्राह्मी, जलनीम
4उड़ियाब्राह्मी (Brahmi)
5असमियाब्रह्मी (Brahmi)
6कन्नड़नीरब्राह्मी (Neerbrahmi), ओडेगल (Audegal)
7गुजरातीजल ब्राह्मी (Jal brahmi)
8तमिलनीराब्रह्मी (Neerabrahmi)
9तेलुगुशम्ब्रनी चेट्टु (Shambrini chettu)
10बंगालीब्राह्मीशाक (Brahmishak)
11नेपालीमेधा गिरी (Medha giree)
12मराठीब्राह्मी (Brahmi)
13मलयालमबार्ना (Barna)
14मणिपुरीब्रह्मी-साक (Brahmi-sak)

ब्राह्मी का उपयोग कैसे करें (brahmi ke fayde and uses )

ब्राह्मी का सेवन विभिन्न रूपों में किया जा सकता है।

  • तेल brahmi oil )
  • वटी (brahmi tablet )
  • चूर्ण (brahmi powder )
  • ब्राह्मी शर्बत (brahmi sharbat)

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ब्राह्मी तेल के फायदे ( brahmi tel ke fayede in hindi )

ब्राह्मी के तेल का प्रयोग आयुर्वेद में प्राचीन काल से होता आया है। इसका सर्वाधिक प्रयोग स्मरण शक्ति बढ़ने के लिए किया जाता है। इस तेल के प्रयोग से मस्तिष्क को और भी अधिक तीव्र और सतर्क बनाया जा सकता है। इस तेल में एंटी डैंड्रफ गुण भी पाए जाते है। यदि आप रात को सोते वक़्त इस तेल का प्रयोग सर में करे तो आपकी रुसी की समस्या का समाधान हो सकता है।

जोड़ो के दर्द, सूजन में रहत पाने के लिए गठिया और मोच में भी प्रभावी रहता है। नींद न आने की समस्या हो या चिंता का कारण ये इन्द्रियों को शांत करता है और एकाग्रता बढ़ता है।

ब्राह्मी वटी के फायदे ( brahmi vati ke fayde in hindi )

Brahmi tablet या वटी का इस्तेमाल आयुर्वेद में प्राचीन काल से होता आया है। यह कड़वी स्वाद वाली होती है। इसकी तासीर ठंडी होती है। इस औषद्यि का उपयोग अवसाद, बेहोशी, तोतलापन दूर करने में तथा भूख बढ़ने में काफी मात्रा में होता है।

वटी के सेवन से मस्तिष्क सम्बन्धी सभी समस्याओं का निवारण होता है। स्नायु तंत्र को ये स्वस्थ बनती है। हाई ब्लड प्रेशर में आराम दिलाती है। खांसी की समस्या को दूर करने में भी ब्राह्मी वटी का प्रयोग कर सकते हैं।

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इस वटी में ब्राह्मी, शंखपुष्पी, वाचा , कालीमिर्च, गोजिह्वा, स्वर्ण भस्म, रास सिन्दूर, जटामासी क्वाथ इत्यादि होता है। यह डाबर, हिमालया, बैद्यनाथ और पतंजलि की मिलती है।

ब्राह्मी चूर्ण के फायदे (brahmi powder )

वटी, और तेल की भांति ही चूर्ण के भी कई सारे स्वास्थ्य लाभ हैं जैसे बच्चों में एकाग्रता, मिर्गी के दौरे से रहत, ह्रदय रोग में आराम, कब्ज और घबराहट में कमी इत्यादि। ब्राह्मी के चूर्ण में Brahmin Alkaloid तत्व होता है जिससे यह हृदय के लिए बड़ी ही गुणकारी होती है। वैसे तो यह चूर्ण बड़ी ही आसानी से पतंजलि, हिमालया, बैद्यनाथ इत्यादि का उपलब्ध हो जाता है।

यहाँ हमने काफी खोज बीन करके उचित मूल्य और गुणवत्ता वाले ब्राह्मी चूर्ण का लिंक नीचे दिया है। आप चाहें तो ये चूर्ण आप नीचे दिए हुए लिंक से भी खरीद सकते है। और यदि आपको इसके सरे घटक मिल जाये तो आप इसे घर में भी बना सकते हैं।

ब्राह्मी चूर्ण कैसे खाएं ( brahmi churna kaise khaye )

यह प्रश्न भी अक्सर पूछा जाता है की ब्राह्मी चूर्ण का सेवन कैसे करें और ब्राह्मी चूर्ण का कितनी मात्रा में सेवन करें। और इसका उत्तर है की 1 चम्मच ब्राह्मी चूर्ण गाय या बकरी के दूध के साथ ही लेना चाहिए। यहाँ हम ब्राम्ही चूर्ण बनाने की विधि नीचे बता रहे हैं। इस चूर्ण को बनाने की लिए और brahmi ke fayde तथा लाभ के लिए निम्नलिखित सामग्री लें।

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ब्राह्मी चूर्ण बनाने की सामग्री ( ingredients for brahmi powder )

  1. ब्राह्मी -15 ग्राम
  2. हरण -15 ग्राम
  3. विभीतकी -15 ग्राम
  4. मुंडी -15 ग्राम
  5. आंवला -15 ग्राम
  6. खांड- 8 ग्राम

ब्राह्मी चूर्ण बनाने की विधि ( brahmi churna banane ki vidhi )

इस चूर्ण को बनाने की विधि बड़ी ही आसान है। सबसे पहले ब्राह्मी, हरण, विभीतकी मुंडी, आवला, बराबर मात्रा में लें और इसे अच्छी तरह कूट लें। इसे इस प्रकार कूटें की इसका एक अच्छा चूर्ण बन जाये। अब इसमें इसमें खांड मिला लें। लीजिये तैयार है आपका ब्राम्ही चूर्ण। अब इसे किसी air tight डिब्बे में बंद कर के रख लें।

ब्राह्मी शर्बत के फायदे ( brahmi syrup benefits )

चूर्ण, तेल, वटी की भांति ब्राह्मी शरबत में भी ब्राह्मी के सारे गुण निहित होते है। स्वास्थ्य अच्छा करने के साथ ही ये शरबत शीतलता भी प्रदान करता है। इस शरबत का प्रयोग ठन्डे दूध या ठन्डे पानी साथ किया जा सकता है। इससे मस्तिष्क में ठंडक पहुँचती है और दिमाग तेज़ करने में काफी फायदेमंद होती है। जाने वाले बच्चो को इस शरबत का सेवन गाय के दूध में मिला कर अवश्य ही करना चाहिए। ब्राम्ही शरबत पतंजलि का सबसे ज्यादा प्रचलित है। यदि आप यह शरबत लेना चाहे तो नीचे इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

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ब्रह्मी में नुट्रिशन वैल्यू (Nutrients in brahmi )

Nutrients in brahmi

विभिन्न रोगों में ब्राह्मी सेवन विधि ( brahmi ke fayede bimariyon me )

पूर्ण रूप से ब्राह्मी के बारे में जानने के बाद अब प्रश्न ये उठता है की विभिन्न बिमारियों में ब्राह्मी के सेवन की क्या विधि है। तो आइये जानते है इन रोगो से निजात पाने के किये ब्राह्मी का सेवन किस प्रकार करना चाहिए।

मिर्गी के दौरे का ब्राह्मी से उपचार ( mirgi ka ilaj brahmi se )

मिर्गी का दौरा पड़ने वाले मरीज को ब्राह्मी चूर्ण गाय के दूध के साथ मिला कर सुबह। दोपहर, शाम दें। ब्राह्मी मिर्गी के दौरे को भी ठीक करने में मदद करता है।

एकाग्रता बढ़ने के लिए ब्राह्मी ( Increase Concentration with brahmi )

आज कल के बच्चों की मुख्य समस्या है बच्चीं का पढाई में मन न लगना। इसका कारण एकाग्रता में कमी है। ऐसे में यदि 3 ग्राम ब्राह्मी चूर्ण गाय के दूध में मिला कर देने से काफी लाभ मिलता है। आप चाहे तो दूध में ब्राह्मी शरबत भी मिला कर दे सकते हैं।

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हृदय रोग आयुर्वेदिक उपचार ( brahmi for heart )

Brahmin Alkaloid तत्व होने के कारण ब्राम्ही ह्रदय के लिए अमृत होता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से ब्राह्मी का सेवन करता है उसका हृदय घात जैसे समस्या से बचाव होता है। इसके लिए आप ब्राम्ही वटी का भी नियमित सेवन कर सकते हैं।

उच्च रक्तचाप (Brahmi benefits for High Blood Pressure )

ब्राम्ही में रक्तशोधक गुण होते हैं। इसलिए ब्राह्मी के नियमित सेवन से blood pressure नियंत्रित करने में मदद करता है। high blood pressure वाले मरीजों को ब्राह्मी की 6-7 पत्तियों का रस शहद के साथ लेना चाहिए। 15 दिनों तक ऐसा करने से high blood pressure से आराम मिलता है।

याददाश्त बढ़ाने के लिए ब्राह्मी का सेवन ( brahmi benefits for brain )

ब्राह्मी की पत्तियां धूप में सूखा लें। एक कटोरी में बादाम की गिरी, सूखी हुई पत्तियां और बराबर मात्रा में लें। अब इसमें 1/4 काली मिर्च मिला कर भिगो दें 1 -2 घंटे बाद इन्हे पीस लें। और लगभग 3 -3 ग्राम की गोलियां बना लें। रोज़ सुबह शाम 1 – 1 गोली दूध के साथ लें इससे दिमाग तेज़ होता है।

अनिद्रा के लिए ब्राह्मी ( Brahmi Uses to Cure Insomnia in Hindi )

नींद न आना आज कल एक आम समस्या बनती जा रही है। इसके लिए ब्राह्मी एक आयुर्वेदिक उपचार हो सकता है। इस समस्या का उपचार करने के लिए सोने के पहले ब्राह्मी के 5 ग्राम चूर्ण को 1/2 ltr दूध में अच्छी तरह उबालें। और इसका सेवन करे। इससे आपकी नींद न आने की समस्या में लाभ मिलेगा।

आशा करते हैं की आपको Mere Gharelu Nuskhe का ये लेख brahmi ke fayde ब्राह्मी के फायदे काफी पसंद आया होगा। यदि आपका इससे सम्बंधित कोई भी सुझाव या प्रश्न हो तो कमेंट में जरूर लिखें।

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